Action Plan of New Human, New India, New World based on Universal Unified Truth-Theory. According to new discovery World Standard of Human Resources series i.e. WS-0 Series like ISO-9000, ISO-14000 etc series
First and last action plan based on universal truth-theory for the rebirth of the world / new world.
नई दुनिया आदेश - कार्रवाई योजना
विश्व के पुनर्जन्म/नये विश्व के लिए सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त आधारित प्रथम एवं अन्तिम कार्य योजना ************************************************************************************************
“जब सभी सम्प्रदायों को धर्म मानकर हम एकत्व की खोज करते हैं तब दो भाव उत्पन्न होते हैं। पहला-यह कि सभी धर्मों को समान दृष्टि से देखें तब उस एकत्व का नाम सर्वधर्मसमभाव होता है। दूसरा-यह कि सभी धर्मों को छोड़कर उस एकत्व को देखें तब उसका नाम धर्म निरपेक्ष होता है। जब सभी सम्प्रदायों को सम्प्रदाय की दृष्टि से देखते हैं तब एक ही भाव उत्पन्न होता है और उस एकत्व का नाम धर्म होता है। इन सभी भावों में हम सभी उस एकत्व के ही विभिन्न नामों के कारण विवाद करते हैं अर्थात्् सर्वधर्मसमभाव, धर्मनिरपेक्ष एवं धर्म विभिन्न मार्गों से भिन्न-भिन्न नाम के द्वारा उसी एकत्व की अभिव्यक्ति है। दूसरे रुप में हम सभी सामान्य अवस्था में दो विषयों पर नहीं सोचते, पहला-वह जिसे हम जानते नहीं, दूसरा-वह जिसे हम पूर्ण रुप से जान जाते हैं। यदि हम नहीं जानते तो उसे धर्मनिरपेक्ष या सर्वधर्मसमभाव कहते हैं जब जान जाते हैं तो धर्म कहते हैं। इस प्रकार विश्व मानक-शून्य (WS-0) : मन की गुणवत्ता का विश्व मानक श्रृखंला उसी एकत्व का धर्मनिरपेक्ष एवं सर्वधर्मसमभाव नाम तथा कर्मवेद-प्रथम, अन्तिम तथा पंचमवेदीय श्रृंखला उसी एकत्व का धर्मयुक्त नाम है तथा इन समस्त कार्यों को सम्पादित करने के लिए जिस शरीर का प्रयोग किया जा रहा है उसका धर्मयुक्त नाम-लव कुश सिंह है तथा धर्मनिरपेक्ष एवं सर्वधर्मसमभाव सहित मन स्तर का नाम विश्वमानव है जब कि मैं (आत्मा) इन सभी नामों से मुक्त है।”
पी.एम. बना लो या सी.एम या डी.एम, शिक्षा पाठ्यक्रम कैसे बनाओगे? नागरिक को पूर्ण ज्ञान कैसे दिलाओगे? राष्ट्र को एक झण्डे की तरह, एक राष्ट्रीय शास्त्र कैसे दिलाओगे? ये पी.एम. सी.एम या डी.एम नहीं करते, राष्ट्र को एक दार्शनिक कैसे दिलाओगे? वर्तमान भारत को जगतगुरू कैसे बनाओगे? सरकार का तो मानकीकरण(ISO-9000)करा लोगे, नागरिक का मानक कहाँ से लाओगे? सोये को तो जगा लोगे, मुर्दो में प्राण कैसे डालोगे? वोट से तो सत्ता पा लोगे, नागरिक में राष्ट्रीय सोच कैसे उपजाओगे? फेस बुक पर होकर भी पढ़ते नहीं सब, भारत को महान कैसे बनाओगे?
आँठवें अवतार श्रीकृष्ण के मुख से निकला और महर्षि व्यास कृत ”गीता“ में 18 अध्याय हैं। इस पुस्तक में भी 18 अध्याय हैं। अब वह समय आ गया है कि कालानुसार ”गीता की उपयोगिता“ और ”उपयोगिता की गीता“ पर विचार हो, जिससे आध्यात्मिक एवं दार्शनिक विरासत के आधार पर ”एक भारत - श्रेष्ठ भारत“ तथा ”नया भारत "(New India)" के निर्माण का मार्ग निर्धारण हो सके